इश्क, प्रेम , मुहब्बत जो
दरिया कहलाता था
कभी आग का..
बनकर रह गया शुरुवाती
आकर्षक मात्र और
केवल किताबी -बातें..!
प्रेम के लिए सात जन्म
कम हैं, एक प्रेम दिवस
सिर्फआडम्बर मात्र.. .!
एक रिश्ता
जिसकी सरहदें
जिस्म से जिस्म तक
घुट कर रह जाती है
अक्सर प्रेम- व्यवसाय में...!
नहीं पढ़े जाते मन...
दूर रहकर नहीं महसूस
करता अब महबूब उसकी
बैचेनियां, बेताबियां
या वो आभास जो
छूकर उसे आई हवा
में कभी लेला-मजनू
हीरा -रांझा और राधा
से दूर कृष्ण को हुआ
करता था ..;
क्या इस कलयुग में
किसी को होता है
वो दिल में असहनीय दर्द...
जो हर कभी नम कर
देता हो आंखों को..
याद करते ही होने
लगता हो आभास
उस लगाव का कि
कोई है जो अब मन
का कोना खाली करने
को तैयार ही नहीं..
जानते हुए कि वो
कभी नहीं मिल
सकता उसे ..
शायद यही प्रेम है?
जोअब कहीं नज़र नहीं
आता...!!
*सीमा शिवहरे सुमन*
दरिया कहलाता था
कभी आग का..
बनकर रह गया शुरुवाती
आकर्षक मात्र और
केवल किताबी -बातें..!
प्रेम के लिए सात जन्म
कम हैं, एक प्रेम दिवस
सिर्फआडम्बर मात्र.. .!
एक रिश्ता
जिसकी सरहदें
जिस्म से जिस्म तक
घुट कर रह जाती है
अक्सर प्रेम- व्यवसाय में...!
नहीं पढ़े जाते मन...
दूर रहकर नहीं महसूस
करता अब महबूब उसकी
बैचेनियां, बेताबियां
या वो आभास जो
छूकर उसे आई हवा
में कभी लेला-मजनू
हीरा -रांझा और राधा
से दूर कृष्ण को हुआ
करता था ..;
क्या इस कलयुग में
किसी को होता है
वो दिल में असहनीय दर्द...
जो हर कभी नम कर
देता हो आंखों को..
याद करते ही होने
लगता हो आभास
उस लगाव का कि
कोई है जो अब मन
का कोना खाली करने
को तैयार ही नहीं..
जानते हुए कि वो
कभी नहीं मिल
सकता उसे ..
शायद यही प्रेम है?
जोअब कहीं नज़र नहीं
आता...!!
*सीमा शिवहरे सुमन*

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