Thursday, February 13, 2020

*
फागुन* (गीत)

रंगीला फागुन आया है ।
रंगीला फागुन आया है ।
वधू-वसुधा भी पुलकित है ,
वो परिणय-पत्र लाया है ।


हिलोरें ले रहा है मन
उमंगें खिलखिलाई हैं ,
रंगीले पी से मिलने को
धरा ने रूप सजाया है ।


रंगीला फागुन आया है ----


ओढी है जो फूलों की
धरा ने चूनर सतरंगी ,
सजाई माँग किंशुक से
सिंदूरी रंग भराया है ।


रंगीला फागुन आया है ----

चंचल शोख़ हवाओं की
हुई कैसी शरारत ये ,
कपोलों में धरा के लाल-
गुलाबी रंग लगाया है  ।


रंगीला फागुन आया है ----


बौर आए रसालों पर
हुई चंपई फ़िज़ाएं भी ,
मधूरी तान में कोकिल ने
मंगल गीत गाया है  ।

रंगीला फागुन आया है ----


*वंदना दुबे*

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