Friday, January 31, 2020

आशा जाकड़

शारदे नवचेतना वर दो।

 ज्ञान चाहता है अंतर्मन,
हर्षित हो जायें जन- जन,
अनुपम शक्ति दो।
शारदे चेतना वर दो।

वाणी का श्रंगार तुम्हीं हो,
शब्दों का उपहार तुम्हीं हो,
छन्द सुमन वर दो।
शारदे चेतना वर दो।

सप्त स्वरों की तुम हो रानी,
ऋषि मुनियों की तुम हो वाणी,
वीणा के मधुर स्वर दो।
शारदे चेतना वर दो।।

आशा जाकड़
9754969496

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