आत्मविश्वास
मुझे बचपन से ही उस काम को करने का शौक और जज़्बा होता था ,जिसके लिए ये कहा जाता था कि ये तुम नही कर पाओगी।
ईश्वर की कृपा भी रही कि उन कार्यों को मैं सफलतापूर्वक कर पाई।
इसी से सम्बंधित एक घटना जीवन मे घटी।
मेरी एक प्रिय सखी रोज सुबह ऐरोबिक्स वर्क आउट करने जाया करती थी।मैं सुबह उठने में बेहद आलसी थी।
एक रोज मुलाकात के दौरान मैंने उनसे कहा कि मैं भी तुम्हारे साथ चलूंगी और ऐरोबिक्स करूंगी।उन्होंने हंसते हुए कहा तुम और ऐरोबिक्स, तुमसे नही होगा।
ये बात मुझे अंदर तक चुभ गयी।इसे मैंने चुनौती की तरह लिया और अगले ही सुबह से क्लास जाने लगी।
मैंने पूरी लगन से ये विधा सीखी और आज मैं स्वयं एक ऐरोबिक्स ट्रेनर हूँ।
हर उम्र की लगभग 40 महिलाओं को मैं घर के पास के बगीचे में प्रशिक्षण देती हूं और उनका प्यार ,स्नेह और आशीर्वाद ही मेरी ताकत है।
* अचला गुप्ता
इंदौर

बहुत सुंदर विचार
ReplyDeleteधन्यवाद दी
Deleteधन्यवाद दी
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