Tuesday, January 28, 2020

*"बसंत पंचमी'*
हे ऋतुराज,
ले बसंत बहार,
पीली सरसों फैली,
धानी चुनरिया ओढ़े,
तितली पंख फैलाये,
कोयल कुहू कुहू बोले,
अमवा में आये बौर,
लटकते हुए खट्टे मीठे बेर,
ली मौसम ने अंगड़ाई,
धरती ने घूँघट ओढ़ ली,
फागुन के बासंती गीत लिए,
खुशियां चहुँ ओर फैला हुआ,
छेड़े तान सुरीली आवाज में,
भौरें का गुंजन शोर लिए,
वादियों का नव सृजन हुआ,
लो बसंत पंचमी का आगमन हुआ।
*शशिकला व्यास*

No comments:

Post a Comment

Featured Post

हिंदी पखवाड़े पर इंदौर संघ लेखिकाओ के पसंदीदा पुस्तकों पर विचार

एक सच्चा रिश्ता एक अच्छी किताब की तराहा होता है,  कितनी भी पुरानी हो जाए, फिर भी शब्द नहीं बदलते, रास्ते बहुत मिलेंगे भटकाने के लिए, लेकिन स...