Sunday, January 12, 2020

शून्य से शिखर

शून्य से शिखर तक,,,. भारत के मूर्धन्य धार्मिक महात्माओं में अपना शीर्ष स्थान बनाने वाले विश्व गुरु स्वयं तो शिखर तक पहुंचे ही ,उनकी प्रेरणा से असंख्य भारतीय नौजवानों ने आसमान की ऊंचाइयों को छुआ।
 युवावर्ग के प्रेरणा स्त्रोत स्वामी जी शेरों सी ओजस्वी हुंकार उठो,जागो और आगे बढ़ो,,,,आज भी।
निराश युवा पीढ़ी में आत्मविश्वास का संचार करती है। विश्व धर्म सम्मेलन में आपने लगातार तीन घंटे तक सभा को बांधे रखा।
वह भी शिकागो में,,,विदेशी भूमि पर।मात्र भाइयों और बहनों से अपना भाषण प्रारंभ कर अभूतपूर्व सफल वक्ता बन देश का नाम रोशन किया। किसी ने भारतीय गीता का महत्व पूछा तो स्वामी ने गीता पर कई किताबों का बोझ रखकर समझाया कि यह सब भार सहन कर सकती है।

* सरला मेहता

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