कुहू कुहू कोयल की गुंजन।
ऋतु वसंत का हुआ आगमन ,
हर्षित और उल्लासित तन मन।
वीणा वादिनी की करें आराधना,
विद्या का अमृत हम पाएं।
पीत वस्त्र की आभा दमके,
रौशन मानो सभी दिशाएं।
करें प्रार्थना ईश्वर से हम ,रंग
खुशी से दमके जीवन।
सुंदरता प्रकृति सी पाएं
दर्पण सा उज्ज्वल हो हर मन।
अचला गुप्ता
इंदौर

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