कविता
बसंती अहसास
बसंती ऋतु ने फिर लीअंगडाई। है,
देखो देखो सखि बासंती बयार खुशियों की सौगात लाई है,
फूल रहे टेसु,गुलमोहर और अमलतास,अमराई मे फिर बौरौ की बहार आई है,बासंती ऋतु ने फिर ली अंगडा़ई है,
कोयल की मीठी तान भी बसंती
राग गुनगुनाऐ है,
बासंती फूलो ने रस बरसाया है,
बासंती ऋतु ने फिर ली अंगडाई है।
पीली सरसों, धानी चुनरिया ओढ़
धरती ने किया सोलह ऋंगार है,
मंद मंद बहे मधुर बयार,
बासंती ऋतु ने फिर ली है
अंगडा़ई है।
द्वारा --- वंदना अर्गल।
बसंती अहसास
बसंती ऋतु ने फिर लीअंगडाई। है,
देखो देखो सखि बासंती बयार खुशियों की सौगात लाई है,
फूल रहे टेसु,गुलमोहर और अमलतास,अमराई मे फिर बौरौ की बहार आई है,बासंती ऋतु ने फिर ली अंगडा़ई है,
कोयल की मीठी तान भी बसंती
राग गुनगुनाऐ है,
बासंती फूलो ने रस बरसाया है,
बासंती ऋतु ने फिर ली अंगडाई है।
पीली सरसों, धानी चुनरिया ओढ़
धरती ने किया सोलह ऋंगार है,
मंद मंद बहे मधुर बयार,
बासंती ऋतु ने फिर ली है
अंगडा़ई है।
द्वारा --- वंदना अर्गल।

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