युवाओ प्रति संदेश
अमिता मराठे
इन्दौर
एक कविता लक्ष्य पहले स्वयं को पहचानो बाद मे लक्ष्य तय करो लक्ष्य का संकल्प लो
जिसमे कोई विकल्प न हो अपने सोच ऊँचे रखो ठानकर पीछे न हटो इस वादे से
आगे बढो फल की न कोई आशा हो पुराना सब भूल जाओ बीती को बिन्दी लगाओ समय व्यर्थ बर्बाद न हो इसका पूरा ध्यान रखो अकर्मण्यता को दूर करो सदा ऊँचा लक्ष्य रखो लक्ष्य का आनन्द लो मेहनत पर भरोसा हो
एक दिन भी अवकाश न लो भारत भू से नाता जोडो स्वस्थ मन से विचार करो भ्रष्टाचार से
मुक्त रहो विकारो से आजाद हो यूं ही जय हिन्द ना बोलो कर्मयोग का पाठ पढो ज्ञान योग की शिक्षा लो नियन्त्रण शक्ति
को जानो उमंग-उत्साह मे बने रहो स्व को ऐसा श्रेष्ठ
बना लो जिससे लक्ष्य स्वयं आगे हो स्व सुखाय
एक कविता लक्ष्य पहले स्वयं को पहचानो बाद मे लक्ष्य तय करो लक्ष्य का संकल्प लो
जिसमे कोई विकल्प न हो अपने सोच ऊँचे रखो ठानकर पीछे न हटो इस वादे से
आगे बढो फल की न कोई आशा हो पुराना सब भूल जाओ बीती को बिन्दी लगाओ समय व्यर्थ बर्बाद न हो इसका पूरा ध्यान रखो अकर्मण्यता को दूर करो सदा ऊँचा लक्ष्य रखो लक्ष्य का आनन्द लो मेहनत पर भरोसा हो
एक दिन भी अवकाश न लो भारत भू से नाता जोडो स्वस्थ मन से विचार करो भ्रष्टाचार से
मुक्त रहो विकारो से आजाद हो यूं ही जय हिन्द ना बोलो कर्मयोग का पाठ पढो ज्ञान योग की शिक्षा लो नियन्त्रण शक्ति
को जानो उमंग-उत्साह मे बने रहो स्व को ऐसा श्रेष्ठ
बना लो जिससे लक्ष्य स्वयं आगे हो स्व सुखाय
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