देखो मां शारदे के बसंतोउत्सव कि,बही बासंती बयार है।
मां स्वरपाणी के चरणो को करते, बारंबार वंदन नमस्कार है।
विद्या,बुद्धि, स्वर,वाणी कि देवी का, करते हम पूजन है।
आओ ऋतु के राजा बसंत,आपका करते हमअभिनंदन है।
शिशिर कि सर्द हवाये भी अब हमसे दूर होती जाती है।
जाडो़ कि कुनकुनी लगती धूप में भी,चूभन सी आती है।
हरियाली के नवांअंकुरित फूलो से प्रकृति ने किया श्रंगार है।
नवयौवनाओ के रूप से भी,छलका मनमीत के लिये प्यारहै।
पीले मीठे चावल की महक,चहुंऔरपीले वस्त्रो का नजारा है।
करे स्वागत हम सब ये बसंत पंचमी का पर्व बहुत प्यारा है।
ये उत्सव बहुत ही प्यारा है।
लेखक,,जनार्दन शर्मा (आशु कवी हास्य व्यंग
मां स्वरपाणी के चरणो को करते, बारंबार वंदन नमस्कार है।
विद्या,बुद्धि, स्वर,वाणी कि देवी का, करते हम पूजन है।
आओ ऋतु के राजा बसंत,आपका करते हमअभिनंदन है।
शिशिर कि सर्द हवाये भी अब हमसे दूर होती जाती है।
जाडो़ कि कुनकुनी लगती धूप में भी,चूभन सी आती है।
हरियाली के नवांअंकुरित फूलो से प्रकृति ने किया श्रंगार है।
नवयौवनाओ के रूप से भी,छलका मनमीत के लिये प्यारहै।
पीले मीठे चावल की महक,चहुंऔरपीले वस्त्रो का नजारा है।
करे स्वागत हम सब ये बसंत पंचमी का पर्व बहुत प्यारा है।
ये उत्सव बहुत ही प्यारा है।
लेखक,,जनार्दन शर्मा (आशु कवी हास्य व्यंग

No comments:
Post a Comment