स्वरचित:बसंत
इंद्रधनुषी गगन,सुरम्य पवन
शीतल जल,हरित पुष्पित भूतल।।
मंद मंद स्वच्छंद पवन,
चहूंओर फैलाती सुगंध।।
नवयौवना की तरह मदमाता,
प्रतिशाख प्रतिपुष्प पर लहराता।।
आरुषी संग ओस के मोती बिखराता,
सिंदूरी सांझ संग धरा पर छा जाता।।
मनभावन अतिपावन मधुर आगमन
देखो आ गया बसंत, वसुधा पर छा गया बसंत।।
ममता कानुनगो इंदौर
इंद्रधनुषी गगन,सुरम्य पवन
शीतल जल,हरित पुष्पित भूतल।।
मंद मंद स्वच्छंद पवन,
चहूंओर फैलाती सुगंध।।
नवयौवना की तरह मदमाता,
प्रतिशाख प्रतिपुष्प पर लहराता।।
आरुषी संग ओस के मोती बिखराता,
सिंदूरी सांझ संग धरा पर छा जाता।।
मनभावन अतिपावन मधुर आगमन
देखो आ गया बसंत, वसुधा पर छा गया बसंत।।
ममता कानुनगो इंदौर

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