Tuesday, January 28, 2020

तराश रही टेसू के तन मन को ये सिरफिरी हवाएं बसंत की
भंवरो के मन उपवन में फिर सजीं मदमाते फूलों की प्रीत कोयल के अधरों पर आया
पेडों का मनपसंद गीत
फिर निभाने का वक्त आया
वही प्रेम की पुरानी रीत।
नीति अग्निहोत्री

No comments:

Post a Comment

Featured Post

हिंदी पखवाड़े पर इंदौर संघ लेखिकाओ के पसंदीदा पुस्तकों पर विचार

एक सच्चा रिश्ता एक अच्छी किताब की तराहा होता है,  कितनी भी पुरानी हो जाए, फिर भी शब्द नहीं बदलते, रास्ते बहुत मिलेंगे भटकाने के लिए, लेकिन स...