Sunday, July 28, 2019

एक कविता यह भी



सुरों मे शब्द भर दो ,
भाव का मकरंद भर दो,
एक दिव्यानंद भर दो ।
शब्द जिसमें तथ्य हो ,
समूचे अनुभवों का ,
शब्द हो मेरे उन कहकहों का
जो दर्द की अनुभूतियों
में थे लगायें पर आँखों से जो अश्क बनकर बह न पाये। ।
अरे पगली शब्द लेकर क्या करोगी,
खुद पढो़गी या धरोगी ।
गुन गुनाओगी इन्हें एक
रागिनी में  ,
साथ लेकर सोये रहोगी
यामिनी में ,
जिसकी तुमको है आस,
शबद हर्गिज़ नहीं कहेगें वह कहानी ।
जो कहता है इन नयनों का पानी ।
    मनोरमा जोशी ।

1 comment:

  1. नयनों का नीर शब्दों से अधिक भावनात्मक होता है आदरणीय मनु भाभी को साधुवाद।

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