बिछिंयाँ पायल की हैं रीत
यह सुहाग का प्रतीक ।
छन छन बजती पायल ,
महकता जीवन मे संगीत
घर के बड़े बूढ़े शुभ मोहरत मे करते है रस्म ।
ईशवर के आषिश लेकर ,
प्रथम मिलन के गाते गीत
रीत रिवाजों की पूर्णता से
यह कार्य होता संपूर्ण ।
चाँदी के पायल बिछिंयाँ
मे सूर्य चँन्द्र की मिलती उर्जा ,
यही है पोराणिक मान्यता ।
मनोरमा जोशी ।

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