![]() |
| कुसुम सोगानी |
कि स्कूल कालेज में हमेशा उनकी कविता ही पढ़ती व सुनाया करती थी।
एक बार मुझेउनके हाथों सम्मानित होने का मौका भी मिला था । सालों साल हो गये
मुझे उनके साहित्यिक नाम काम
इतना पसंद था कि मैने अपने भतीजे का नाम स्कूल में नीरज रखवाया व घर में गोपालदास बोला करते थे।😊😄
मेरे मायके की पूरी फ़ैमिली उनसे प्रभावित व उनकी किताबें
ख़रीदा करती थी।

No comments:
Post a Comment