Friday, July 19, 2019

नीरज औऱ यादे

कुसुम सोगानी
नीरज जी से मैं इतनी प्रभावित थी
कि स्कूल कालेज में हमेशा उनकी कविता ही पढ़ती व सुनाया करती थी।
एक बार मुझेउनके हाथों सम्मानित होने का मौका भी मिला था । सालों साल हो गये
मुझे उनके साहित्यिक नाम काम
इतना पसंद था कि मैने  अपने भतीजे का नाम स्कूल में नीरज रखवाया व घर में गोपालदास बोला करते थे।😊😄
मेरे मायके की पूरी फ़ैमिली उनसे प्रभावित व उनकी किताबें
ख़रीदा करती थी।

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