Thursday, July 18, 2019

नीरज औऱ क्षणिकाएं


बारिशों से
नहीं कमतर
 जब भी बरसते हैं
 बरसते हैं जमकर ।

● इस ज़मी के कण-कण में
 नृत्य -संगीत की रवानी है
साहित्य ,गीत-प्रीत की
अद्भुत सी कहानी है।

● कुछ ज़मी, ऐसी भी कहीं
 कि सोचना पड़ता है
  कहां सांसे अटकी हैं
कि पैर  उठते ही नहीं!

●एक  है सबसे ‘मुकम्मल रंग'
  वो है ख़ुदाई का रंग
अगर उसका छिड़काव
हो जाये  तो उतरता नहीं
सभी पर यही रंग चढ़ जाये
 तो सार्थक  हो जाये
 मेरा इस पन्ने पर 
भावों के रंग उकेरना
 और सच हो जाए
" *सत्यम  शिवम  सुंदरम "*
 की सुंदर संकल्पना।

©अनुपमा अनुश्री

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