Saturday, July 20, 2019

भारतीय नारी के सुहागिन का चिन्ह बिछिया

भा
रतीय नारी का पारम्परीक गहना-- बिछिया
  सदियों से भारतीय नारी के पारम्परीक गहने प्रसिद्ध रहे हैं।
भारतीय धर्म के अनुसार ये गहने सर्वप्रथम दैवी, माता ने धारण किये।
पार्वती, लक्ष्मी, सरस्वती ने बिंदी, चूड़ी, हार, पायल, बिछुड़ी को धारण किया और उसे धरती पर भारतवर्ष में नारी सम्मान का प्रतीक बनाया।
सुंदरता और बुद्धिमता , ज्ञान और तेज को परिभाषित करते गहनों में बिछिया को भी नारी ने म त्वपूर्ण गहना मानकर धारण किया।
चूड़ी, बिंदी और पायल की तरहा सुहागन स्त्री का प्रमुख सुहाग बिछिया बन गया।
नारी पायल के साथ साथ पैरों की उंगलियों को दो दो तीन तीन बिछिया से संवारने लगी।
शादि में मांग भरने और मंगलसूत्र पहनाने के साथ साथ पति बिछिया भी पत्नि के पैरों में पहनाकर आव्हान करता है कि--" हे नारी तुम लक्ष्मी की तरहा मपायल और बिछिया धारणकर मेरे घर में प्रवेश करो और भेरे घर को धनधान्य करो।"
  पायल के साथ बिछिया भी शुभ प्रतीक मानी गयी।
इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी रहे।
बिछिया तीनों ऊंगलियों में पहनने से -- ह्दय, पेट और पैर की घुटनों से सम्बनाधित बीमारी नहीं होती है।
चांदी का इस्तेमाल इसलिये किया गया है। चांदी की ड़ंड़ी का नसों में दबाव पड़ते ही तीनों ऊंगलियों से सम्बन्धित शरीर के हर अंग में उसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और औरत स्वस्थ रहती है।
जिंदगी भर शारीरिक कार्य - खाना बनाना, झाड़ू पोंछा, बरतन कपड़े धोना सब कार्य के लिये वो स्वस्थ रहती है और घर को स्वर्ग बनाती है।
यही कारण है कि---
छोटी सी बिछीया बड़ा सा गहना बनकर पैरों में इठलाती है।
सुंदरता का प्रमाण बन जाती है।
नारी को लुभाती है। तरहा तरहा के सुंदर सुंदर नक्काशियों में गढी जाती है।
    सुषमा व्यास 'राजनिधि'

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