दिखाते हुए एक मूकबधिर युवा के बारे में कहा जा रहा है कि इनकी इनकमिंग और आउटगोइंग बंद है।इस बात ने मुझे विचलित कर दिया ।किसी की भी कमियों के इस तरह वर्णन बेहद शर्मनाक है।इस संदर्भ में एक घटना याद आ रही है ।हमारे कॉलेज में चुनाव प्रक्रिया चल रही थी और सभी मस्ती के मूड में भी थे।एक दिन हमने देखा कि एक छात्र लंगड़ाने का अभिनय करते हुए एक दिव्यांग छात्र के पीछे चल रहा था और उसके मित्र उसका साथ दे रहे थे।इस घटना ने मुझे व्यथित कर दिया।
तकरीबन चार महीने बाद हम क्लास में थे ।अचानक बाहर शोरगुल की आवाज और किसी के चीखने की आवाज सुन कर बाहर दौड़े तो पता चला कि उसी छात्र को कुछ लोगों ने पैर में चाकू से हमला कर बुरी तरह घायल कर दिया है।बाद में भी वह पूरी तरह ठीक नही हो पाया।एक दिन कॉलेज के बरामदे में जब मैं खड़ी थी तब उसे लंगड़ाते हुए चलते देख पिछली घटना को याद करते हुए सोचने लगी कि सचमुच जो जैसा करता है ,वैसा ही भरता है।ईश्वर की नजर सभी पर है और न्याय सभी के साथ होता है चाहे देर से ही क्यों न हो।
अचला गुप्ता
इंदौर

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