Saturday, July 20, 2019

बिछिया और परम्परा

बिछिया
पूनम शर्मा
हिन्दू समाज में फेरों के समय पहनाया जाता है,मेरे लिए यह बेहद सुखद अनुभव था क्योंकि हमारे यहां सुहागन होने का प्रतीक यही माना जाता है,जब मेरी शादी हुई तो तो तीन ऊंगली और अंगुंठे में बिछिया पहनाए गए , पैरों में पाजेब जिसमें बहुत सारे घुंघरू थे वो पहनाए गए थे,दुल्हन के सोलह श्रृंगार में इसका बहुत महत्व होता हैआज भी मेरे लिए इसको पहनना बहुत महत्व रखता है,मेरे लिए ये फैशन में नहीं आता है, साइंटिफिकली ये प्रूव हो चुका है इसको पहनने से स्वास्थ्य पर बहुत अच्छे प्रभाव पड़ता है

1 comment:

Featured Post

हिंदी पखवाड़े पर इंदौर संघ लेखिकाओ के पसंदीदा पुस्तकों पर विचार

एक सच्चा रिश्ता एक अच्छी किताब की तराहा होता है,  कितनी भी पुरानी हो जाए, फिर भी शब्द नहीं बदलते, रास्ते बहुत मिलेंगे भटकाने के लिए, लेकिन स...