Saturday, July 20, 2019

भारतीय पशुमाता औऱ सदस्यों की अनुभूति

भारतीय पशुमाता और समूह सदस्यों की लेखनी
गौमाता की महिमा तो शब्दों में  कहना मुश्किल है।गाय को गौ माता ऐसे ही नहीं कहा गया है ।अभी भी मां जब नवजात शिशु को दूध नहीं  पिला पाती तो चिकित्सक गाय का दूध पिलाने की कहते हैं । मेरी खुद की जान दो बार गाय के दूध से बची है। बचपन में  ठीक एक साल बाद ही मेरे भाई का जन्म हुआ इसलिए मुझे गाय के दूध सेही पाला गया। मुझे माता जी का दूध नहीं के बराबर ही मिला । दूसरी बार जब मैं  अपने मामा के बेटा हुआ तो संभालने गईं मामी को तो वे सब्जी में  सरसों का तेल उपयोग में लाती थीं । एक महीने तक मैंने वही खाया करीब तीन साल तक मैं मिर्ची नही खा पाई। पूरे शरीर में  जलन और खुजली ।ऐसे में मेरा विवाह हुआ और सुराल में दो गाएं थीं ।उनका दूध अमृत साबित हुआ क्योंकि वह शीतल व पाचक होता है ।जय गौ माता की ।
पहले कच्चे घर होते थे और घरों में गाय के गोबर से  लिपाई होती थी ।दीवारें भी गोपर से लीपते थे । विज्ञान ने सिद्ध किया कि गोबर एंटी बायोटिक रिच मिनरल्स से  भरपूर होता है जो सौर विकिरण को रोकता है । हिंदू धर्म में स्थान की शुद्धि के लिये गौमूत्र छिड़का जाता है । यह क ई बिहारियों में  भी काम आता है और बहुत से  इसका बिमारी में पान करते हैं । यह बाइल म्यूकस को और हार्ट की बिमारी मे भी काम आता है ।।गाय के गोबर के कंडे औरमघी से हवन किया जाए तो वातावरण के किटाणुओं को समाप्त करता है । गाय पर रोज हाथ फेरने से  हाई बी पी कम होता है
श्री देवकीनंदन ठाकुर जी के सत्संग मे एक ने यही बात पूछी कि आजकल घर छोटे हैं और गाय नहीं पाल सकते तथा रोटी देने के लिए भी गाय नही दिखती तो क्या करें ॽ महाराजी ने कहा कि किसी गौशाला मे दान कर दें राशि या कुछ लोग समूह बना कर गौशाला बनाएं और सेवादार रख दे मिल कर देखभाल के लिए ताकि बूढ़ी गायों की भी सेवा हो सके । 
सही मे प्रगति के इस दौर में हमने अपने प्राचीन मूल्य खोए है । गायों को कसाईयों के हवाले किया जाता है ।गाय पालने का तो प्रश्न ही नहीं है ।कब हम अपनी धर्म और संस्कृति का महत्व समझेंगे । कीउपेक्षा क्योंॽ 
नीति अग्निहोत्री
गाय हमारा परिवार भी
🐂🐂🌺🌺....🌺🌺.....

 ?आपने कभी सुना या देखा
कि गायें बक़ायदा ड्राइंग रूम से 
प्रवेश कर अपने निवास याने 
तथाकथित गाय भैंस के कोठे में जाकर विश्राम लें। 
       हाँ मैंने देखा व रोज़ देखा है,
बहुत सालों पहले - मेरे मायके में गाय भैंस रखी जाती थीं फ़ैमिली मेंबर की तरह...
असल में बंगले के चारों तरफ़ 
मे से एक ओर गाय भैंस का बाड़ा 
बाड़ा  दूसरी तरफ़ कुँआ व चारों तरफ़ बग़ीचा था ।
गायें अनजाने में पेड़ या हरी सब्ज़ी की पत्तियाँ व मक्का आदि न खायें इस चक्कर में पिताजी 
उन्हें घर के अंदर से बुलवाते थे जबकि बाहर से भी रास्ता था 
उन्हें पानी छान कर ही पिलवाया जाता था।
उनके खाने के बड़े घमेले होते थे 
जिनमें बचा खाना दिया जाता था।
पिताजी ने शुरु से गाय मूक प्राणी है ये बताया पर हमारी कितनी जीवनोपयोगी है बताया।
गाय को रोटी फेंक कर नहीं हाथों से खिलाने की कोशिश करना चाहिये बताया।
येपशुधन है , इसका सम्मान करना चाहिये , सब बातें उन्होंने घुट्टी में ही पिला दी थीं। 
गाय पे निबंध या लेख लिखना आसान है पर गाय उचित तरीक़े से पालना साधारण बात नहीं 
पर उन्होंने हमें सब सिखाया । 
मुझे गर्व है कि शादी के समय मुझे गाय का दूध दुहना 
कंडे थोपना गाय की प्रसव पीड़ा पर लापसी बनाना व बछड़ा या या बछिया जन्म के बाद गाय को हरीरा बना कर देना आताथा। 
गाय के नवजात बच्चे को बाँस से बोतल नुमा कर दूध भी पिलाया है। रोज़ गायों को भी णमोकार मंत्र सुनाना बताते थे।बातें हल्की फुल्की हैं पर कितने लोगों को तजुरबा मिलता है । मैं भाग्यशाली रही कि मुझे गौमाता की किंचित् मात्र सेवा करने का अवसर मिला।
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प्रेषिका:- कुसुम सोगानी
कुसुम सोगानी
माँ ने कहाँ बेटा गाय को रोटी तो दे आ आज  दादाजी का श्राद्ध है और पहली रोटी पर तो गौ माता का ही हक है । 36 करोड देवता उनके शरीर में है गाय को माता कह कर पुकारा जाता हैं ।माँ समझा रही बेटा बडे ध्यान से सुन रहा था ।बोला माँ गाय तो है नहीं नगरपालिका वालों ने गाय को बाहर छोड दिया और कुत्ते गली में घूम रहे जिसे पालना  चाहिए उसका कत्ल हो रहा और जिससे डर हैं खतरनाक जानवर कुत्ते पाले जारहे । जो काट ले तो पेट मैं इन्जेक्शन लगते है पर सब उल्टा हो रहा है।
चारुमित्रा नागर


चरुमित्रा नागर
[20/07, 7:56 PM] +91 89895 04551: 🙏🏻 हे निर्दयी कसाइयों,मुझे मत मारो🙏🏻
मैं हूँ तुम्हारी भोली गैय्य्या जिसको जग पुकारता भोली भाली मैय्या
सदियों से पूजन,अर्चन कर  खिलाते तुम रोज रोटियां
मैं भी अपने बच्चे के हिस्सेका
दूध पिला देती तुम को भैय्या
चतुर्थ काल मे तो होते थे एक किशन कन्हैय्या
पंचम काल मे कँहा गए वो गोप गोपियाँ
🤔😭भक्ति कर भाव भासित होववेसा होगया जग का निष्ट्ठुर रवैय्या
प्रभा जैन
देखसुन,दिल रोवे,भक्त का भैय्या
मुझ भोली भालीका कसूर क्या
मैं तो देती हर दम जिंदगी को निधियां
कँहा गए वो कृष्ण गोपिय सद्बुद्धि दो उन क्रूर कसाइयों को,जिनको दिखता सिर्फ रुपैय्या
हाथ जोड़ नमन करती प्रभा मैं
सद्बुद्धि दो उन हत्त्यारोंको
गौ माता को पूजनीय माता समजो,नहीं बचोगे उन नरकों के डरावने दुखों से।
आओ हर जीवों को खुद सम समजो,,महावीर प्रभुका " जियो और जीने दो" का संदेश  फैलाएं।सुखी रहे हर जीव जग में ऐसी सुख की घड़ियां लाये।🙏🏻😊🐂
स्वरचित : प्रभा जैन।19 जुलाई 2019

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