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| चेतना भाटी |
फूल खिले , भँवरे डोले
तितली बोली
बसंत आया - बसंत आया
कोयल कूकी , मन हर्षाया
बसंत आया - बसंत आया
मस्तानी पवन चली
अनुराग - पराग बिखराया
आम बौराया
बसंत आया - बसंत आया
फूले पलाश , कचनार शरमाया
बसंत आया - बसंत आया
अमलतास के झूमर झूमे
गुलमोहर गुदगुदाया - गुलगुलाया
बसंत आया - बसंत आया
चेतना भाटी


अति सुंदर
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