जो मेरे होने का अक्स दो शब्दों की बनावट
हां वह मेरे ही हाथों से लिखा गया अक्षर
हस्ताक्षर हस्ताक्षर
गहरे से गहरा असर छोड़ गया हस्ताक्षर
दो जान बनी अनजान अब
ना छोटी सी जगह मुस्कान को अब
बस एक हस्ताक्षर
माँग का सिंदूर धुल गया
मंगल की जिम्मेदारी मंगल सूत्र के साथ छूट गयी
पता लापता हो गया
हस्ताक्षर हस्ताक्षर
सात फेरे सात पल में हुए स्वाहा
उस अग्नि में जो साक्षी बनी थी उस पल में
बुझ गईं लपटे न बची कोई तपन अब
हस्ताक्षर हस्ताक्षर
ना विवाह विच्छेद, न तलाक का हिंदूनामा
पर पर हस्ताक्षर हस्ताक्षर
स्वाति सिंग


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