Wednesday, February 20, 2019

फागुन की चौपाल

मनोरमा जोशी


होली उत्सव प्रीत का ,
 यह रंगों  का बाजार ,
निशदिन फागुन प्रीत  ,
के नये पढ़ाये  पाठ ।
अखियों ही अखियों ,
हुऐं रंगों के संकेत  ,
रह रह कर महके 
रात भर कस्तूरी के खेत ।
 प्रीत महावर की तरह ,
 इसके न्यारे  है रंग ,
बतियाती पायल हँसे ,
हँसे  ऐड़ियाँ  संग ।
 रंगों  वाले  आईने ,
 भूलें  सभी  गुमान  ,
जो भीगें वो  जानता ,
फागुन  की  मुस्कान ।
दोहे  ठुमरी  सखियां ,
फाग  अभंग  ख्याल ,
मोसम  करता रतजगा ,
फागुन की चौपाल  ।
    
   मनोरमा जोशी 

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