Thursday, February 7, 2019

संस्मरण


श्रीमती कृष्णा श्रीवास्तव


संस्मरण 

मुझे याद आता है बहुत पहले की बात है मेरे पिताजी के मामाजी डॉ शिवदयाल जी की याद आती है ।वे एक दिव्यपुरुष थे।उन्होंने अपना पूरा जीवन दुसरो की सेवा में गुजरा ,वे सभी मरीजो की निशुल्क इलाज करते ही नही थे बल्कि जो मरीज गरीब थे और जिनका ठोर ठिकाना नही था उनको अपने घर मे रहने खाने पीने का भी प्रबंधन करा ते थे शायद यही वहज थी कि मरीज हमेशा उनको घेरे रहते थे ,गरीबो कीप्रार्थना से उनका घर सुख शान्ति और सम्पन्नता से परीपूर्ण था ।उन्होंने मेरे छोटे भाई का लिवर का इलाज ही नहीं  कीया बल्कि उसे अपने पुत्र की तरह पालपोसकर बड़ा भी किया आज वह खुद बच्चों का पिता है और कम्पनी में मैनेजर की पोस्ट पर है । में सोचती हूँ नेक काम का जरूर फल मिलता हैं जब भी हम उनके पास जाते वे हमें बड़े ही प्यार से पेश आते जैसे मन्दिर में जाकर शांति मिलती है ऐसे ही उनके छाँव तले मिलती थी ।

सादर नमन उस दिव्य पुरुष को🙏🏻
श्रीमती कृष्णा श्रीवास्तव
एम.ए. हिंदी

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