![]() |
| आशा जाकड़ |
कैसे मनायेंगे अब होली?
आतंकी खेल रहे खूनी होली ।
बहिनों के नेह का सूना हुआ डगर ,
कपोलों पर बहता सूख गया समन्दर ।
बिन भैया कैसे लगायेंगी माथे पे रोली?
कैसे मनायेंगे अब होली ?
ललनाओं के माथे का सिन्दूर मिट गया,
सारा संसार उनका अब वीरान हो गया ,
कभी न सुनेगी अब वे प्रीतम की बोली।
कैसे मनायेंगे अब होली ?
घर का एक चिराग ही गुल हो गया ,
मातृभूमि की वेदी पर शहीद हो गया ,
घर के आँगन कैसे गूँजे अब ठिठोली ?
कैसे मनायेंगे अब होली?
विदा दे रहे खेत,गाँव और नगर ,
जा रहे सिपाही सीमा पर हर पहर ,
बन्दूक की चल रही दनादन गोली ।
कैसे मनायेंगे अब होली ?
अबोध बच्चे पूछेंगे कब आयेंगे तात ,
कब लायेंगे खिलौने,कब खायेगे साथ,
कृष्ण बिन अब राधा कैसे खेलेगी होली?
कैसे मनायेंगे अब होली ?
आतंकी खेल रहे खूनी होली ।।
आशा जाकड़ ( कवयित्री )

बहुत मामिक,बहुत बढि़या
ReplyDeleteवाह, बहुत खूब।
ReplyDeleteवाह बहुत सुंदर
ReplyDelete