Thursday, February 7, 2019

एक अरज ऋतुराज से

डॉ अर्चना श्रीवास्तव "ओमप्रिया"
तुम्हारा स्वागत है ऋतुराज
तुम्हारा स्वागत है ऋतुराज

जानती हूं लाए हो मदमस्त,मदमाती बयार
पर दिल खुश हो तो ही लगता मौसम खुशगवार
सबके दिल में खुशी का बजा दो साज

तुम्हारा स्वागत है ऋतुराज

जैसे तुम देते हो धरा को नवजीवन 
और विटप को देते हो नव पल्लवन


वैसे ही मुस्कराहटों का करो आगाज
तुम्हारा स्वागत है ऋतुराज

हमारी नव पीढ़ी माया के मकड़जाल में हो गई है हताश,
नहीं देखती खिली कली कचनार की और दहका फूल पलाश
उनके मन हुलास का अपने कर दो आगाज

                                                                        तुम्हारा स्वागत है ऋतुराज

रंजिशे,गम, पीड़ा,हटा दे दो प्रफुल्लित तन और मन
नफ़रतें सारी भुला,बांट दो सारे जहां को चैनोंअमन
तो" ओमप्रिया "धर देगी तेरे सिर पर ताज

तुम्हारा स्वागत है ऋतुराज
तुम्हारा स्वागत है ऋतुराज

डॉ अर्चना श्रीवास्तव "ओमप्रिया"

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