Saturday, February 23, 2019

नशीला फागुन




डॉ अंजुल कंसल"कनुप्रिया"
राधा चूनर रंग गई धानी
फागुन में कान्हा करे बेइमानी,
सरस सराबोर करें होली में
साजन करें मनमानी।

लिख अपना नाम साजन
गुलाबी रुमाल दे गए हाथ,
फागुनी इत्रदान याद दिलाए
पल पल पिया का साथ।

नशीला फागुन काव्य-किरण
करती अनोखी अठखेलियां,
ऋतुराज की अगवानी
फाग गीत गाती सहेलियां।

बसंत राग की रंग रागिनी
तरन्नुम में गाती गीत-गजल,
नायिका करे प्रीत -श्रृंगार
घूंघट डाल रही कोंपल।

डां अंजुल कंसल"कनुप्रिया"

No comments:

Post a Comment

Featured Post

हिंदी पखवाड़े पर इंदौर संघ लेखिकाओ के पसंदीदा पुस्तकों पर विचार

एक सच्चा रिश्ता एक अच्छी किताब की तराहा होता है,  कितनी भी पुरानी हो जाए, फिर भी शब्द नहीं बदलते, रास्ते बहुत मिलेंगे भटकाने के लिए, लेकिन स...