![]() |
| डॉ अंजुल कंसल"कनुप्रिया" |
फागुन में कान्हा करे बेइमानी,
सरस सराबोर करें होली में
साजन करें मनमानी।
लिख अपना नाम साजन
गुलाबी रुमाल दे गए हाथ,
फागुनी इत्रदान याद दिलाए
पल पल पिया का साथ।
नशीला फागुन काव्य-किरण
करती अनोखी अठखेलियां,
ऋतुराज की अगवानी
फाग गीत गाती सहेलियां।
बसंत राग की रंग रागिनी
तरन्नुम में गाती गीत-गजल,
नायिका करे प्रीत -श्रृंगार
घूंघट डाल रही कोंपल।
डां अंजुल कंसल"कनुप्रिया"

No comments:
Post a Comment