Thursday, February 21, 2019

कैसे मनाएंगे अब होली?



   
आशा जाकड़



कैसे मनायेंगे अब होली?
आतंकी खेल रहे खूनी होली ।

बहिनों के नेह का सूना हुआ डगर ,
कपोलों पर बहता सूख गया समन्दर ।
बिन भैया कैसे लगायेंगी माथे पे  रोली?
कैसे मनायेंगे अब होली ?

 ललनाओं के माथे का सिन्दूर मिट गया,
सारा संसार उनका अब वीरान हो गया ,
 कभी न सुनेगी अब वे प्रीतम की बोली।
कैसे मनायेंगे अब होली ?

घर का एक चिराग ही गुल हो गया ,
मातृभूमि की वेदी पर शहीद हो गया ,
घर के आँगन कैसे गूँजे अब ठिठोली ?
कैसे  मनायेंगे अब होली?

विदा दे रहे खेत,गाँव और नगर ,
जा रहे सिपाही सीमा पर हर पहर ,
बन्दूक की चल रही दनादन गोली ।
कैसे मनायेंगे अब होली  ?

अबोध बच्चे पूछेंगे कब आयेंगे तात ,
कब लायेंगे खिलौने,कब खायेगे साथ,
कृष्ण बिन अब राधा कैसे खेलेगी होली?
कैसे मनायेंगे अब होली ?
आतंकी खेल रहे खूनी होली ।।




  आशा जाकड़ ( कवयित्री )

3 comments:

Featured Post

हिंदी पखवाड़े पर इंदौर संघ लेखिकाओ के पसंदीदा पुस्तकों पर विचार

एक सच्चा रिश्ता एक अच्छी किताब की तराहा होता है,  कितनी भी पुरानी हो जाए, फिर भी शब्द नहीं बदलते, रास्ते बहुत मिलेंगे भटकाने के लिए, लेकिन स...