एक तनहा सा चाँद था
एक खामोश सा आसमां
एक सन्नाटे सी रात थी
एक चुपचाप सी लय थी
मुझको जहाँ से बाँधें.....।
वो मौन जो झाँक रहा था
कोलाहल के पीछे से
वो नयन जो ताक रहे थे
अंधियारों के नीचे से
एक मध्यम सी ख़लिश थी
मुझको जहाँ से बाँधे.....।।
एक बेचैनी सी उड़ती थी
एक राहत दबे पाँव आती
एक साया जो खुशबू बन के उड़ा
एक मौज शून्य से आती थी
अकसर कह जाती थी मुझसे
कोई न कोई तो वजह है
मुझको जहाँ से बाँधे....।।।
Priyanka
अद्वैता
एक खामोश सा आसमां
एक सन्नाटे सी रात थी
एक चुपचाप सी लय थी
मुझको जहाँ से बाँधें.....।
कोलाहल के पीछे से
वो नयन जो ताक रहे थे
अंधियारों के नीचे से
एक मध्यम सी ख़लिश थी
मुझको जहाँ से बाँधे.....।।
एक बेचैनी सी उड़ती थी
एक राहत दबे पाँव आती
एक साया जो खुशबू बन के उड़ा
एक मौज शून्य से आती थी
अकसर कह जाती थी मुझसे
कोई न कोई तो वजह है
मुझको जहाँ से बाँधे....।।।
Priyanka
अद्वैता

Aati sunder rachna...!!!
ReplyDeleteकविता बांधने वाली है।
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