Thursday, August 22, 2019

परचम

शान्ति का परचम् लहराना है

हमें धरा पर शान्ति का परचम् लहराना है।
स्वार्थ को दूर  भगा इसे स्वर्ग  बनाना है।

खून के रिश्ते सिसक रहे
रिश्तों  में  आगयी दरार।
पावनता सब नष्ट हो रही
जीवन में हो रही टकरार।
ईर्ष्या- द्वेष छोड़ प्रेम की जोत जलाना है।
हमें धरा पर शान्ति का परचम् लहराना है।।

नदियों का पावन देश हमारा
मन्त्रोच्चार का ये देश हमारा।
आधुनिकता की अंधी दौड़ में
कुसंस्कारी होरहा देश हमारा।
कुसंस्कार मिटा सुसंस्कार-फूल खिलाना है । हमें  धरा पर शान्ति का परचम् लहराना  है।।

व्यर्थ की भागमभाग दौड़ में
जीवन हो रहा तनाव  पूर्ण ।
सुख सुविधाओं की चाहत में
नहीं किसी के मन को सुकून।
नफरत की दीवार तोड प्रेम-वंशी बजाना है।
हमें  धरा पर शान्ति का परचम् लहराना है।।

स्वार्थ के रिश्ते पनप रहे
धर्म - कर्म सब भूल रहे।
ऊँचा बनने की  चाहत में
अपने अपनों को लूट रहे।
भेदभाव छोड़ एकता का पाठ पढाना है।
हमें धरा पर शान्ति का परचम् लहराना है ।।

आशा जाकड़ (इन्दौर )
9754969496

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