बृज मे बटत बधाई ,
जन्मे कुअँर कन्हाई ।
आँधी रात घणी बरसात,
जमना खल खल उबराई,
जन्मे कुअँर कन्हाई ।
कारागृह के बंद द्धार ,
बिन चाबी ताले खुल गये,
अदभुत लीला रचाई ,
जब जन्मे कुअँर कन्हाई।
जहाँ जन्म लिया वहां पिया दूध नहीं ,
जहाँ दूघ पिया वहां लिया
जन्म नहीं ,
दो दो माता ने खुशियां मनाई ।
ऐसे जन्मे कुअँर कन्हाई।
कंस मामा का करने सफाया,
रची कान्हा ने ऐसी माया ,
धन धन प्रभु की चतराई ,
शोभा बरणी न जाई ।
बाजत ढोल नगाड़ा घर घर ,
और बाजे शहनाई ।
जब जन्मे कुअँर कन्हाई ।
.मनोरमा जोशी ।

No comments:
Post a Comment