मेरा मन लोचे घेवर को ,
हरियाली तीज है आयी ।
आयी ऋतु सोलह श्रृंगार की ,
आयी सावन के फुहार की ,
आयी अरमान के बहार की ,
आयी तेरे मेरे प्यार की ।
मेरा मन लोचे चुनर को ,
मतवाली तीज है आयी ।
वेणी ने बालों को सजाया ,
सिंजारा पीहर से आया ,
टीका, साड़ी , नथनी लाया ,
माँग ने सिंदूर लगाया ।
मेरा मन लोचे महावर को ,
निराली तीज है आयी ।
पायल , बिछुए छन - छन करते ,
चूड़ियाँ , कंगन खन - खन करते ,
हुस्न के आज अंबार लगे ,
पिया संग ' मंजु ' गुलनार लगे ।
डॉ . मंजु गुप्ता
वाशी , नवी मुंबई

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