Sunday, August 18, 2019

हरतालिका तीज




लघुकथा

शीर्षक

हरतालिका

बहु आज कुछ नहीं खाना पानी भी नहीं पीना  शाम को पूजा करके ही  कुछ लेना । रीना तो जैसे  मरसी गई  अरे शाम तक  पानी भी नहीं । कैसे रहेगी भुखी प्यासी ।  तीसरा महीना चल रहा , मे नहीं खाउगी तो बच्चा  भी भुखा रहे गा । दिन भर घर का काम , रीना काम निपटा कर रूम मे आराम करने के लिए आई तो देखती हैं ।की मनोज पहले ही जूस लेकर बैठा उसी का इन्तज़ार कर रहा था । रीना तुम जूस पीयो   पर  आज माँ ने कहाँ पानी भी नहीं पीना ,  और माँ को पता चला तो आज पति की लम्बी उम्र के लिए ये हरतालिका   करते है   मे जूस कैसे पी सकती हूं  । मनोज ने कहाँ जब पति खुद तुम्हें पीला रहा हैं। तो पति का कहना मानना चाहिए ना जिसके लिए  ये सब कर रही हो ।  और तूम तो  एक और जीव की रक्षा कर रही हो । सबसे बडा तो यहीं उपवास हुआ ना तुम्हारा , उससे भगवान भी खुश  उपास का मतलब किसी की आत्मा को तकलीफ न हो  बस हो गया वत 

चारुमित्रा नागर

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