नीले नीले आकाश से ,
सपनों की इक बूँद गिरी ।
सपनों की इस बूँद ने,
दिल को यूँ आनन्दित किया।
आनन्द के अहसास को ,
मैंने 'अमित'है नाम दिया।
नाम नहीं जीवन का सत्य है यह,
जो कुछ है, बस यही है यह।
आओ,ओर अनुभव करो,
धड़कन की थिरकती आवाज़ो को।
जिसके अभिभूत घन- घन से,
मैंने जीवन के सरगम का गान किया।
पुलकित हुई इस छुअन से मैं,
और आँखों का है, साथ लिया।
नीर बरसती आँखों से,
मैंने इस आनन्द को जीया।
बस जाओ मेरी इन आँखों में,
मैंने तो बस तुम्हें है जीया।
हाँ तुम थे, तुम हो ओर तुम रहोगे सदा,
इस विश्वास को कुमकुम से सीया।
माथे पर बनी लकीरों को,
लाल रंग से यूँ है सिया।
तेरे विश्वास को कंगन सा पहने,
मैंने 'अमित'है है नाम दिया।
स्वरचित,
अदिति सिंह भदौरिया।
[18/10, 11:46] Sushma Viyas: कान्हा-राधिका की करवाचौथ----
राधिका तुम कौन भाग लेकर आई
कान्हा ने कर कमलों से प्रेम अमृत पिवाई
तुम बड़भाग ज्यों श्यामरस अधर लगाई
सांवरे के मन मंदिर में तुम ही तुम हो समाई
ज्यों ही तो ब्रह्माण्ड़ में चहूं ओर
राधे श्याम राधे श्याम की गूंज दे सुनाई
सुष'राजनिधि'

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