भारत सरकार , राज्य और गांधीवादी संस्थाएँ गांधी जी की १५० वीं जयंती जोर - शोर से मना रही हैं ।जो देश - विश्व में पूरे साल गांधी से संबंधित विविध कार्यक्रम आयोजित कर रही हैं .
राष्ट्रपति महात्मा गांधी का चरित्र राष्ट्र चरित्र है . गांधी एक विचार नहीं है . बल्कि गतिशील संस्था , एक संस्कृति है . एक विश्वास , संकल्प है . मानवता का विश्वविद्यालय है . नैतिक , मानवीय मूल्यों से इंसान का निर्माण नहीं हुआ तो वह देश कभी भी उन्नति , विकास नहीं कर सकता है . गांधी की राजनीति आध्यात्म से जुड़ी थी . जो पारदर्शी थी . आज की राजनीति ठीक इसके विपरीत भ्रष्टाचार , झूठ , दागी मंत्रियों से लिप्त है .
गांधी जी के व्यक्तित्व , आदर्शों का प्रभाव भारतीयों के साथ विदेशियों पर भी पड़ा था . गांधी जी के दर्शन , अहिंसावादी नीतियों , प्रवृतियों , शिक्षा , सामूहिकता का गवाह साबरमती का आश्रम है . जहाँ भारतीय संस्कृति बसी और गांधी मूल्यों की रूह भी बसी है . जहाँ स्वाबलंबन के संग चरखा संस्कृति को बढ़ावा दिया . जो खादी तक ही सीमित नहीं था बल्कि दिनचर्या में आने वाली स्वदेशी वस्तुओं का उत्पाद किया जाता था . उस जमाने में छुआछूत को हेय से देखा जाता था . गांधी जी ने छुआछूत मिटाने का काम इसी आश्रम से शुरू किया . गांधी जी की बहन ने अस्पृश्यता का विरोध किया तो उसी को वहाँ से निकाल दिया .
डॉ मंजु गुप्ता वाशी
डॉ मंजु गुप्ता वाशी

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