गाँधी जी मेरी नजर में
सात्विक पवित्र और आत्मिक शुध्दता के प्रतीक हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी को जानना हमारे लिए बहुत ही सरल होते हुए भी उनके आचरण को अपने जीवन में उतारना उतना ही कठिन है। गाँधी जी के सत्याग्रह और आन्दोलन उनके जीवन में किये गये प्रयोग थे। जन जन का भरोसा दिखावे से नही जीता जा सकता। उसके लिए जीवन में सत्य , अहिंसा और सदाचार के आचरण की जरुरत होती है।
जिधर चल पडे दो पग
उधर चल पडे हजारों डग।
ये उस सादगी के साथ खडे जन थे। जिनका विश्वास गाँधी जी के विचारों में शामिल था। अहिंसक महात्मा के विचार ही सबके लिए प्रेरणा थे। ब्रिटिश हुकुमत उनकी सात्विक विचारों की ताकत को कुचल पाने में असफल रही। उनकी आजादी वर्ग जाति सम्प्रदाय धर्म से बहुत बहुत ऊपर थी। व्यक्तिगत लाभ लोभ उनकी राष्ट्रीयता के बोध को कभी अपने जाल में नही फंसा सके। इसी कारण गाँधी जी सर्वमान्य राष्ट्र पिता बने रहेंगे। पद और राजनीतिक लोकप्रिय छवि की तुच्छता उन्हें कभी मोहित नही कर सके।
डा.विनीता रघुवंशी प्राध्यापक हिन्दी शासकीय महाविद्यालय, टिमरनी (जिला हरदा)
डा.विनीता रघुवंशी प्राध्यापक हिन्दी शासकीय महाविद्यालय, टिमरनी (जिला हरदा)
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