Sunday, October 13, 2019

शब्द और राग समूह🙏🌹🌹🙏 दिनांक 12/10/19 वार शनिवार चित्र आधारित रचना🙏🌹🌹🙏 वो प्रथम स्पर्श था माँ का जब हाथों में मुझको लिया होगा। प्यार से मुझको जब उन्होंने छुआ होगा। सहलाया होगा मेरे गालों को जब माँ ने हाथों से हौले से झुलाया भी होगा माँ ने। आँचल में अपने छुपा कर रखा होगा मुझे सीने से लगाकर दूध पिलाया होगा मुझे। पैरों पर लिटाकर मुझको अपने नर्म हाथों से की होगी मालिश जो मेरी थपकियां देकर फिर सुलाया होगा मुझे। ओ प्यारी माँ तेरे उस निश्छल प्यार का कोई मोल नही जो में चुका पाऊँगी कभी। आज मैं भी बनी हूँ माँ तब जाना कितना कष्ट होता है माँ बनने में। माँ बनना कोई आंसन बात नही कितनी बार मैने जाने अनजाने में दिल दुखया है तेरा । पर अब वापस तो आओ माँ फिर कभी तुम्हारा दिल नही दुखाउंगी। करुँगी मैं सेवा तुम्हारी अपने हाथों से तुम्हारें प्यार का थोड़ा सा तो कर्ज चुकाउंगी। मैं भी करुँगी मालिश तुम्हारी जैसे बचपन में तुमने की थी मेरी में भी तुमको अपने हाथों से सहलाउंगी। कितना थक जाती होगी तुम हमको सम्हालतें सम्हालतें । एक बार फिर आ जाओ माँ अब में तुमको समहलूंगी।🙏🌹🌹🙏 मंगला श्रीवास्तव इंदौर स्वरचित मौलिक रचना। 🙏🙏🌹🌹🙏🙏

No comments:

Post a Comment

Featured Post

हिंदी पखवाड़े पर इंदौर संघ लेखिकाओ के पसंदीदा पुस्तकों पर विचार

एक सच्चा रिश्ता एक अच्छी किताब की तराहा होता है,  कितनी भी पुरानी हो जाए, फिर भी शब्द नहीं बदलते, रास्ते बहुत मिलेंगे भटकाने के लिए, लेकिन स...