* प्रभा जैनकरवा चौथ, चाँद सा सजना मेरा ,जिसकी आभा से मैं चांदनी चमकी शीतल शीतल प्यार की किरणें प्रस्फुटित होती ,जिसके दिख जाने से मेरा रोम रोम खिल जाता,, पिया तुम जग में रहो सदा ,इस चंदा की तरह चमकते और मेरी मांग का सिंदूर रहे सदा दमकते। आज के करवा चौथ पर शुभ भावना मैं भाती हम तुम दोनों जन्मों जन्म मिलते रहे हर दम चाहे चंदाकरवा चौथ, चाँद सा सजना मेरा ,जिसकी आभा से मैं चांदनी चमकी शीतल शीतल प्यार की किरणें प्रस्फुटित होती ,जिसके दिख जाने से मेरा रोम रोम खिल जाता,, पिया तुम जग में रहो सदा ,इस चंदा की तरह चमकते और मेरी मांग का सिंदूर रहे सदा दमकते। आज के करवा चौथ पर शुभ भावना मैं भाती हम तुम दोनों जन्मों जन्म मिलते रहे हर दम चाहे चंदा बादलों में छिप जाए,चाहे दिख जाए तुम तो हर दम रहो मेरे आँचल में छिप छिप के। प्रभा जैन बादलों में छिप जाए,चाहे दिख जाए तुम तो हर दम रहो मेरे आँचल में छिप छिप के।
*प्रभा जैन

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