Saturday, October 19, 2019

करवाचौथ लाल रंग में सजी सुहागन , तन पर जेवर खूब सजे। आभा चेहरे की दमके और मन मे प्रीत मृदंग बजे। निर्जल व्रत कर सात जन्म का साथ मांगती माता से। छलनी से हर जन्म उन्हें ही देखूं ,कहे विधाता से। बहुरानी पर प्यार उमड़ता , सासूमाँ मुस्काती है। पुत्रवधु की छवि देख वह वारी वारी जाती है। पूजा की थाली ,सजाती गीत मधुर सब गातीं है। यही संस्कृति हर रिश्ते की महत्ता हमे बताती है। सदा सुहागिन रहे तू नारी सिंदूर सजा हो माथे पर । चौथ माता से यही प्रार्थना करते हैं सब झुका के सर।
 अचला गुप्ता इन्दौर

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