![]() |
| Add अनुराधा |
कषटो से उबारो माँ, सात चक्र है
माटी का पुतला, मूलाधार से सहसञार तक, व्याकुल है जनमानस माँ कलयुग दुख से भरा हुआ, अपने जन को तारो माँ
शंख, चक़, गदा, पद्,हल और मूसल से दुश्मनों को मारो माँ
अकाल -मृत्यु ,रोग-शोक,भूत-पिशाच देखते ही दूर भागे माँ
अनुराधा
--------------
![]() |
| नम्रता. सरन सोना |
शुभ वरदायिनी
सुखों की दाता।।
मोहक छबि
मुस्कान मनोहर
मनभावन रूप।।
आशीष पाऐं
दरबार माता का
जो कोई आए ।।
रौद्र रूपिणी
दानव संहारक
दुष्टों का ह्रास ।।
करुणा मयी
ममता बरसातीं
दुखों का नाश ।।
जगत जननी
बारंबार प्रणाम
नैया को तार ।।
*नम्रता सरन "सोना"*
---------
![]() |
| शारदा मिश्रा |
तो कष्ट मिटे।।
भवतारिणी
रूप मनोहारिणी
करो उद्धार ।
माँ वीणापाणि
ज्ञान का वरदान दो
अज्ञान मिटे ।।
मां नवदुर्गा
दुखों का करे नाश
भरे प्रकाश ।।
। महामाया रक्षा कर माँ
शारदा मिश्रा
--------



No comments:
Post a Comment