Thursday, April 4, 2019


स्त मस्त भगोरिया
मस्ताने फागुन ने बिखेरे  कई रंग
भगोरिया को भी लाया है अपने संग
रिश्तों की खुशहाली का मौसम आया
दिल के द्वार पर खुशियों की दस्तक लाया ।

 बाग बगीचों खेतों  में टेसू  है दहका
प्रणय निवेदन के रस  युवा में छलकाता
मस्त नशीला  महुआ फ़िजाओं  में चहका
गदराया आम बोर सपनों को महकाता ।

  डालों  पर  कोकिल पंचम स्वर में पी बुलाए
मन वीणा के तार मिलन की आस  जो लाए
प्रेम प्रीत नेह स्नेह से  सुरभित गगन धरा
छुअन की सिहरन से उल्लासित ऋतु अधरा ।

मैं तेरी भाषा तू मेरा भाव है  पिया
करता है अर्ज आज तुझ से मेरा हिया
 बीड़ी शराब नशे से रहना तुम अब  दूर
साफ -सफाई स्वच्छता का बरसाना नूर ।

  तेरे  चुड़ला पायल से   करूँ सोलह श्रृंगार
 खिला दे पान का बीड़ा चलूँ तेरे  द्वार
खुशियों का गुलाल मल  छिटका प्रेम  छटा
गीत छंद में घुली है तेरे शबाव की घटा ।
डॉ मंजु गुप्ता
वाशी , नवी मुंबई ।

No comments:

Post a Comment

Featured Post

हिंदी पखवाड़े पर इंदौर संघ लेखिकाओ के पसंदीदा पुस्तकों पर विचार

एक सच्चा रिश्ता एक अच्छी किताब की तराहा होता है,  कितनी भी पुरानी हो जाए, फिर भी शब्द नहीं बदलते, रास्ते बहुत मिलेंगे भटकाने के लिए, लेकिन स...