स्त मस्त भगोरिया
मस्ताने फागुन ने बिखेरे कई रंग
भगोरिया को भी लाया है अपने संग
रिश्तों की खुशहाली का मौसम आया
दिल के द्वार पर खुशियों की दस्तक लाया ।
बाग बगीचों खेतों में टेसू है दहका
प्रणय निवेदन के रस युवा में छलकाता
मस्त नशीला महुआ फ़िजाओं में चहका
गदराया आम बोर सपनों को महकाता ।
डालों पर कोकिल पंचम स्वर में पी बुलाए
मन वीणा के तार मिलन की आस जो लाए
प्रेम प्रीत नेह स्नेह से सुरभित गगन धरा
छुअन की सिहरन से उल्लासित ऋतु अधरा ।
मैं तेरी भाषा तू मेरा भाव है पिया
करता है अर्ज आज तुझ से मेरा हिया
बीड़ी शराब नशे से रहना तुम अब दूर
साफ -सफाई स्वच्छता का बरसाना नूर ।
तेरे चुड़ला पायल से करूँ सोलह श्रृंगार
खिला दे पान का बीड़ा चलूँ तेरे द्वार
खुशियों का गुलाल मल छिटका प्रेम छटा
गीत छंद में घुली है तेरे शबाव की घटा ।
डॉ मंजु गुप्ता
वाशी , नवी मुंबई ।

No comments:
Post a Comment