Thursday, April 18, 2019

अल्लाह

कल मैं ट्रेन से यात्रा कर रहा था तो एक भिखारी मेरे पास आया और बोला....

*"अल्लाह के नाम पर कुछ दे दो बाबा"*

मैंने नजर उठा कर निर्विकार भाव से उसे देखा और बोला ....

*"मैं अल्लाह को नहीं मानता" तो क्यों दे दूँ ???*🚩🚩🚩
*उसने घुरकर मुझे देखा.. तो....*
*उसके बाद मैंने उसे प्रस्ताव दिया कि....*

*तुम "भगवान राम" के नाम पर मांगो तो मैं तुम्हें 10 रुपया दूँगा*.

*इस पर वो मेरा मुँह ताकने लगा और ट्रेन के आसपास के लोग भी कौतूहल से हमें देखने लगे.*

*फिर, मैंने अपने प्रस्ताव को और अधिक आकर्षक बनाते हुए कहा कि.... अगर वो भगवान राम के नाम पर मांगेगा तो मैं उसे "50 रुपया" दूँगा.*

*लेकिन, वो भिखारी इसके लिए तैयार नहीं हुआ और भुनभुनाते हुए चला गया*.

*और, मैं भी मन ही मन "उसकी कट्टरता को भांपकर, पेपर पढ़ने लगा.*

*लेकिन, इस घटना से मुझे ये सीख मिल गई कि....* *एक भिखारी जिसके पास खाने को कुछ नहीं है और भीख मांगकर अपना जीवन-यापन करता है, वो भी "धन के कारण, अपने धर्म से समझौता" नहीं करता है*.

*तो क्या हम हिन्दू.... एक भिखारी से भी ज्यादा गए-बीते हैं .... जो अपने निजी स्वार्थ (धन अथवा पद) की लालच में अपने धर्म से गद्दारी करने व सेक्यूलर बनने को हमेशा एक पैर पर खड़े रहते हैं*????

*सोचना अवश्य....* 🧐🧐🙏🏻🚩

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