वाह री किस्मत
एक वो हैं जो
दिन रात करते हैं ,
प्रार्थना
पर गूंजती नहीं किलकारी
उनके अंगना।
जहां बरबस औलाद
अपना डेरा जमाए है,
एक नहीं दो नहीं
पूरे सप्तरंगी इंद्रधनुष
समाए हैं।
पुलिस वाला भी
हाथ जोड रहा है।
धन्य हैं आप
सात बच्चों के बाप।
बधाई बधाई
खूब फले फूलें
एक मोटर साइकिल
पर सवार आप नौ हैं
पूरे नौ के नौ हैं।
झटपट यहां से निकल जाइये
मेरा मुंह मीठा कराते जाइये।
डां अंजुल कंसल"कनुप्रिया"

No comments:
Post a Comment