विश्व पुस्तक दिवस की शुभकामनायें 💐💐👏👏✍📕📚📗📘📕
बहुत झेलती एकाकी पन
या अवसाद दुखित दर्द मन
गर,तुम न होती ,
नहीं चाहती यदि तुमको
तुम संग नेह नहीं लगाती
मैं सूनापन झेल न पाती
मैं संसार असार समझती
गर तुम न होती....
कुछ पल ऐसे होते हैं जो
मन के साथ टहलते हैं
तब कोई नही सुहाता है
बस प्रिय ही स्मृत होता है
उस क्षण की सखी मित्र मेरी
पुस्तक को मेरा वंदन है
शत शत नमन अभिनंदन है
तुम मेरा सहारा
मेरा अभिज्ञान
मेरी पहिचान
मेरा आगाज
पुस्तक मेरा अभिमान हो
जीने का अंदाज हो
✍📙📕📗📘
स्वरचित :- कुसुम सोगानी
बहुत झेलती एकाकी पन
या अवसाद दुखित दर्द मन
गर,तुम न होती ,
नहीं चाहती यदि तुमको
तुम संग नेह नहीं लगाती
मैं सूनापन झेल न पाती
मैं संसार असार समझती
गर तुम न होती....
कुछ पल ऐसे होते हैं जो
मन के साथ टहलते हैं
तब कोई नही सुहाता है
बस प्रिय ही स्मृत होता है
उस क्षण की सखी मित्र मेरी
पुस्तक को मेरा वंदन है
शत शत नमन अभिनंदन है
तुम मेरा सहारा
मेरा अभिज्ञान
मेरी पहिचान
मेरा आगाज
पुस्तक मेरा अभिमान हो
जीने का अंदाज हो
✍📙📕📗📘
स्वरचित :- कुसुम सोगानी

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