Monday, April 22, 2019

चित्र पर आधारित लघुकथा

आचला गुप्ता
पार्वती आज बेहद उदास है।अपने एकलौते बेटे को पढ़ने के लिए शहर भेजा ताकि वह इस गांव की तरक्की के लिए भी कुछ कर सके।लेकिन वह अपनी पत्नी के साथ वहीं बस गया।पार्वती को आज भी उम्मीद है कि एक दिन बेटा आएगा और उसे साथ ले जाएगा ।गांव की आबोहवा उसे नहीं खींच पाई पर मां की ममता तो अटल और विशाल है ,जो अपनी संतान की हर गलती को भुला देती है।पार्वती अब सिर्फ उम्मीद पर ही जी रही है और पथराई आंखों से राह तक रही है।

No comments:

Post a Comment

Featured Post

हिंदी पखवाड़े पर इंदौर संघ लेखिकाओ के पसंदीदा पुस्तकों पर विचार

एक सच्चा रिश्ता एक अच्छी किताब की तराहा होता है,  कितनी भी पुरानी हो जाए, फिर भी शब्द नहीं बदलते, रास्ते बहुत मिलेंगे भटकाने के लिए, लेकिन स...