व्यक्ति
एक लघुकथा
एक बार एक व्यक्ति अपने तीन बच्चो को लेकर डबल डेकर बस से यात्रा कर रहा था।बस कुछ खाली थी।वह व्यक्ति बस की खिडकी के पास विचार मग्न गंभीर अवस्था मे बैठा था।
तीनो बच्चे खाली बस का पूरा पूरा आनन्द उठा रहे थे।एक सीट से दूसरी सीट पर बन्दर के भाँति उछलकूद करने मे मस्त थे।
दूसरे यात्री पहले तो उनकी मौज के दर्शक बने रहे ।अंत मे परेशान होकर उस व्यक्ति की ओर देखने लगे ।जो ऐसा बैठा था मानो उसका कोई संबंध ही न हो ।उन यात्रियो ने उस व्यक्ति के पास जाकर बोला महाशय आपके बच्चे बस मे धम चौकडी मचा रहे है और आप निश्चिन्त बैठे है ।वह व्यक्ति हडबडाकर देखने लगा,स्थिति को समझकर शर्मिन्दा हुआ और बोला
माफ कीजिए हम लोग अभी ही केइएम अस्पताल से आ रहे है।गंभीर बीमारी के कारण बच्चो की माँ का देहावसान हो गया है।मै इसी विचार मे हू कि इन निष्पाप को इस घटना को कैसे बताऊं।
यह सुनते ही बस मे वातावरण बदल गया।एक पारसी युवती ने पर्स मे से बिस्किट का पैकेट निकाला और बच्चो को देने लगी ।सभी यथा शक्ति सहयोग का हाथ बढ़ाया ।अब वे बच्चे शैतान नही लग रहे थे, ना ही वह व्यक्ति बेजवाबदार।
अमिता मराठे
इन्दौर
स्व रचित रचना
एक लघुकथा
एक बार एक व्यक्ति अपने तीन बच्चो को लेकर डबल डेकर बस से यात्रा कर रहा था।बस कुछ खाली थी।वह व्यक्ति बस की खिडकी के पास विचार मग्न गंभीर अवस्था मे बैठा था।
तीनो बच्चे खाली बस का पूरा पूरा आनन्द उठा रहे थे।एक सीट से दूसरी सीट पर बन्दर के भाँति उछलकूद करने मे मस्त थे।
दूसरे यात्री पहले तो उनकी मौज के दर्शक बने रहे ।अंत मे परेशान होकर उस व्यक्ति की ओर देखने लगे ।जो ऐसा बैठा था मानो उसका कोई संबंध ही न हो ।उन यात्रियो ने उस व्यक्ति के पास जाकर बोला महाशय आपके बच्चे बस मे धम चौकडी मचा रहे है और आप निश्चिन्त बैठे है ।वह व्यक्ति हडबडाकर देखने लगा,स्थिति को समझकर शर्मिन्दा हुआ और बोला
माफ कीजिए हम लोग अभी ही केइएम अस्पताल से आ रहे है।गंभीर बीमारी के कारण बच्चो की माँ का देहावसान हो गया है।मै इसी विचार मे हू कि इन निष्पाप को इस घटना को कैसे बताऊं।
यह सुनते ही बस मे वातावरण बदल गया।एक पारसी युवती ने पर्स मे से बिस्किट का पैकेट निकाला और बच्चो को देने लगी ।सभी यथा शक्ति सहयोग का हाथ बढ़ाया ।अब वे बच्चे शैतान नही लग रहे थे, ना ही वह व्यक्ति बेजवाबदार।
अमिता मराठे
इन्दौर
स्व रचित रचना

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