भोली सी जिनकी मुस्कान,
थोड़े से हैं जो शैतान ,
हर घर के आंगन की रौनक ,
ये बच्चे है पुष्प समान।
खुशियों की खुशबू फैलाते ,
घर आंगन में उधम मचाते ,
शैतानी कर चुपके से ,दादी के आंचल में छुप जाते।
गुस्सा खूब दिखाती है माँ,
मन ही मन मुस्काती रहतीं ।
मेरा लाल है मेरा कान्हा ,सखियों
से वह कहती रहतीं।
दादाजी का प्यार बरसता ,
पापा बुनते सपने कल के।
दीदी की आंखों मे ममता ,प्यार
के मोती हर पल झलके।
ये भविष्य हैं ,भावी पीढ़ी है
इनको हम सब सम्भालें।
संस्कार इन्हें उत्तम हम देकर
एक अच्छा इंसान बना लें।
अचला गुप्ता
इंदौर

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