क्या हुआ जो बच्चे हैं
मन के तो हम सच्चे हैं
बात की अपनी पक्के हैं
देश के लिए मर - मिट जाएँगे ।।
माँ के हम सपूत हैं
दुश्मन के लिए भूत हैं
ईश्वर के हम दूत हैं
काम शांति के कर जाएँगे ।।
देश हमारा प्यारा है
सब देशों से न्यारा है
पढ़-लिखकर महान बनेंगे
नाम देश का कर जाएँगे ।।
शहीदों ने इसे ख़ून से सींचा है
हम इसके फूल ये हमारा बाग़ीचा है
हम बच्चे इसकी लक्ष्मण रेखा हैं
रक्षा में इसकी बिछ जाएँगे ।।
मुश्किल से आज़ादी पाई है
वीरों ने अपनी जान गवांई है
हिंदु- मुस्लिम- सिक्ख- ईसाई
देश पर बलीहारी जाएँगे ।।
स्वरचित
उषा गुप्ता
इंदौर

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