Thursday, November 14, 2019

मैंने तुम्हें कितनी बार कहा है कि जल्दी उठा करो, स्कूल हमेशा समय पर पहुँचना चाहिए। मैंने लगभग खींचते हुए अपनी छह साल की बेटी को उठाया ओर साथ ही उसे तैयार करते हुए, समय की पाबंदी पर बोले भी जा रही थी। जब उसकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई तो मैंने उसे डाँटते हुए पूछा तुम सुन भी रही हो। उसने बड़ी मासूमियत से मेरी तरफ देखते हुए कहा, "आप तो कहती थी कि बचपन के दिन बहुत सुहाने होते है, पर मुझे तो लगता है कि बचपन स्कूल ओर कोचिंग के बीच भागने को कहते है। " अपनी बात कहकर उसने अपना बैग लिया ओर स्कूल के लिए निकल गई ओर मैं बेबसी से उसकी

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