गांधी जी एक सच्चे इंसान थे मूलतः । अंदर - बाहर एक से । बिना किसी दुराव - छिपाव के । जो सोचते थे - बोलते थे उसे करते भी थे । मन - वचन - कर्म से पवित्र - समान ।
गाँधी वाद को यदि हम धैर्य व ध्यान पूर्वक पढ़ें तो अपना जीवन संवार सकते हैं आज भी जबकि वे 150 वर्ष पहले जन्मे थे । फिर भी जो शास्वत सत्य है वह तो रहेगा ही । तभी तो वे कहते थे कि - सत्य ही ईश्वर है ।
नियम - संयम - अनुशासन का ही तो पर्याय था उनका जीवन । जिसकी प्रासंगिकता कभी समाप्त नहीं होगी ।
सदा जीवन , उच्च विचार की प्रतिमूर्ति थे वे ।
हम अपना जीवन सादा कर लें , विचार उच्च हो ही जाएंगे । आज हमने अपना जीवन ही जटिल बना रखा है तो विचार भी उलझे - उलझे - भ्रमित करने वाले हैं जो असमंजस - कन्फ्यूजन पैदा करते हैं ।
इंसान का इंसान बने रहना ही बड़ी बात होती है जो कि मोहनदास करमचंद गांधी , हमारे राष्ट्रपिता , बापू थे।
*चेतनाभाटी
67 , मधुबन कॉलोनी
इंदौर - 45200

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